Daily Routine In Hindi | दिनचर्या In Hindi
हमारा आज का BLOG Daily routine in hindi के बारे में हैं | Daily Routine यदि सही रहे, प्रकृति के अनुसार रहे तो कोई भी मनुष्य सफलता एवं निरोगी काया से वंचित नहीं रह सकता हैं | इन दिनों, Daily Routine एक ऐसा विषय भी बनता जा रहा हैं, जो कई Interviews में भी पूछा जाता हैं | Daily routine of successful peoples यह एक ऐसा विषय है जिसे हममे से कई लोग जानना भी चाहते हैं | आज के इस Blog में हम न केवल एक बेहतर Daily Routine को जानेंगे बल्कि कैसे उसे अपनी ज़िन्दगी में अपनाये इस पर भी बात करेंगे | पहले हम बात करते हैं Daily Routine As Per Ayurveda पर |
Daily Routine
In Hindi | Daily Routine As Per Ayurveda :
हम इंसानों का Daily Routine या Dinacharya (दिनचर्या) किस
तरह का होना चाहिए जिससे हमारा स्वस्थ ठीक रहे और बिभिन्न रोगों से दूर रहे, यह
आयुर्वेद में बहुत ही विस्तार से समझाया गया हैं | आयुर्वेद में हर चीज़ को Core
Element से जोड़ा गया हैं |
बीते समय में हमारे पूर्वज एक खास तरीके का
Daily Routine उपयोग करते थे | यह Daily
Routine वह हर दिन धार्मिक होकर पूरी शिद्दत से उपयोग किया करते थे | अब आप
कहोगे की हर civilization में या culture में एक disipline
के routine तो हुआ ही करता हैं, इसमें क्या नयी बात हैं ? पर क्या आपने कभी
सोचा हैं की आखिर क्यों हमारे पूर्वज मिल कर इसी एक Routine पर अपना मत
दिया और आयुर्वेद में खास तोर पर दर्शाया | इसकी एक खास वजह हैं, हमारा शरीर और
हमारी प्रकृति | हमारा शरीर पंचमहाभूत में होता हैं, और इन्ही पांच महाभूत के वजह
से यह पृथ्वी बनी हैं, और पृथ्वी पर सरे जिव जंतु भी इन्ही पांच महाभूतो से बने
हैं |
When to wake | सुबह
कब उठाना चाहिए :
आयुर्वेद के अनुसार ब्रम्हा मुहूर्त
में उठने का समय सही मन गया हैं, तक़रीबन सुबह 4 बजे से 5:30 के बिच | आप लोगो में
से कई लोगो को यह बात पहले से ही पता भी होगी, पर क्या आप जानते हो (Did You
Know) की क्यों इस समय उठाना सही मन जाता
हैं ? क्युकी इस समय हमारे शरीर में कफा (Kpaha Component) कम होने
लगता हैं, और वाता (Vata Component) बढ़ने लगता हैं | साधारण भाषा में कहे
तो शरीर और दिमाग तैयार हो जाता हैं उठने के लिए या चलने के लिए या किसी भी कार्य
को करने के लिए | और यही वाता की विशेषता भी होती हैं | इसलिए इस समय नींद से उठ
जाना चाहिए | आयुर्वेद में इस समय को meditation और योग अभ्यास के लिए उचित
मन गया हैं | ब्रम्हा मुहूर्त को शिक्षा ग्रहण करने का समय भी कहा गया हैं
| आपमें से कई लोगो ने यह महसूस किया होगा की इस समय पर आने वाले सपने हमे याद
रहते हैं | इसका असल कारण यह हैं की आपके शरीर का वाता इस समय जागरूक रहता हैं |
ब्रम्हा मुहूर्त में उठने के बाद हमे
निम्नप्रकार के कार्य करना चाहिए :
१.
अपना पेट साफ़
कर लेना चाहिए |
२.
अपने हाथो और
चेहरे को साफ़ पानी से धो लेना चाहिए |
३.
हमे हमारे
दांत और अपनी जुबान को अच्छे से साफ़ कर लेना चाहिए |
४.
कुछ समय
व्यायाम करना चाहिए |
How Much To Do Work
Out | कितना व्यायाम करना चाहिए :
व्यायाम या योग कितनी देर के लिए करना चाहिए ? इस सवाल का जवाब हमारे शरीर
पर निर्भर करता हैं | यदि किसी मनुष्य का शरीर अधिक वज़न का हैं तब एसे मनुष्य को
अपने वज़न के अनुसार व्यायाम करना चाहिए | वाही किसी व्यक्ति का वज़न सामान्य है तब
उसे समाया व्यायाम करना चाहिए | यदि किसी मनुष्य का वज़न सामान्य से कम हैं, तब उसे
काफी कम-कम ही व्यायाम करना चाहिए | व्यायाम मनुष्य के शरीर पर निर्भर करता हैं |
व्यायाम को कभी किसी अन्य व्यक्ति की होड़ में नहीं करना चाहिए, इससे नुक्सान हमारा
ही होता हैं |
आयुर्वेद हमे बताता हैं की हमे तब तक अपना
व्यायाम नहीं रोकना चाहिए जब तक हमारी बगल में से पसीना न आने लग जाये | क्योकि यह
दर्शाता हैं की हमारे शरीर में सही मात्रा में गर्मी आ चुकी हैं और हमारे शरीर के
सभी अंग अब पूरी तरह से सक्रिय हैं |
When To Bath | कब
नहाना चाहिए :
व्यायाम करने के तकरीबन आधे घंटे के बाद हमे नहाना चाहिए | अब सवाल यह आता
हैं की नहाते समय हमे ठन्डे पानी से नहाना चाहिए या गरम पानी से नहाना चाहिए ? इस
सवाल का जवाब भी हमारे शरीर पर निर्भर करता हैं | एक अधिक वज़न वाले व्यक्ति को
गरम, सामान्य वज़न वाले व्यक्ति को ठन्डे एवं सामान्य से कम वज़न वाले व्यक्ति को अधिक
गरम पानी से नहाना पसंद होता हैं | वैसे तो बहार के वातावरण पर भी हम लोगो के पानी
के तापमान निर्भर करता हैं, पर आयुर्वेद हमारे शरीर के सभी अंगो के स्वास्थ के लिए
यह बताता हैं की हम हमेशा अपने सर को ठन्डे पानी से धोये या कम से कम सामान्य
तापमान के पानी से धोये, क्योकि गरम पानी हमरे बालो के लिए अच्छा नहीं होता हैं |
बालो से सम्बंधित कई बिमारीय गरम पानी से सर धोने की वजह से होती हैं | साथ
ही सर पर गरम पानी पड़ने से हमारी आखों और दिल पर भी इसका बुरा असर पड़ता हैं | यदि
हम बाकि शरीर की बात करे तो हम उसे गरम पानी से धो सकते हैं | यदि साधारण भाषा में
कहे तो हमरे सामान्य तापमान के पानी से नहाना चाहिए |
Meditation | ध्यान :
नहाने के बाद ध्यान (meditation) करने को
कहा गया हैं | जैसे शरीर को व्यायाम की ज़रूरत होती हैं, वैसे ही हमारे दिमाग को भी
व्यायाम की ज़रूरत होती हैं | दिमाग का व्यायाम ध्यान (meditation) से होता
हैं | इस ध्यान को हम पूजा करने नमाज़ पढने आदि से भी कर सकते हैं | ध्यान करने से
हमारे मन में हो रही बेचैने कम होती हैं और हम दिमागी रूप से मज़बूत होते हैं | अब
ऐसे में सवाल आता हैं की ध्यान खली पेट ही क्यों किया जाए, नाश्ता करने के बाद
क्यों नहीं ? इसका जवाब हैं, की नाश्ता करने बाद हमारा पाचन तन्त्र सक्रिय हो जाता
हैं, और पाचन करने के लिए रक्त संचार व्यस्त हो जाता हैं, जो ध्यान में अच्छा नहीं
माना गया हैं | इसलिए ध्यान हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए |
Breakfast | नाश्ता :
नाश्ता हमेशा सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए | जैसे-जैसे सूरज आसमान में
उभरता जाता हैं, वैसे-वैसे हमारे शरीर में अग्नि उठने लगती हैं | आपने यह महसूस
किया होगा की जब आप सूर्योदय से पहले उठत्ते हो तब आपको भूख नहीं लगती हैं | कोई
भी स्वस्थ मनुष्य को सूर्योदय के एक या दो घंटे बाद ही भूख लगने लगती हैं |
आयुर्वेद हमे नाश्ते में हल्का खाना खाने की सलाह देता हैं, जो आसानी से पाच जाये,
क्योकि हमारे शरीर का पाचनतंत्र रात भर से आराम की मुद्रा में होता हैं, और ज्यादा
भरी खाना खाने से पाचनतंत्र पर बुरा असर हो सकता हैं |
नाश्ता करने के आधे घंटे बाद हम हमारा काम
कर सकते हैं, और लगभग 1 बजे तक काम जारी रख सकते हैं |
Lunch | दिन का भोजन :
आयुर्वेद के अनुसार दिन के खाने का समय 1 बजे सही माना गया हैं | दिन का यह
खाना हमारा शरीर सबसे अच्छी तरह पचा पता हैं और शरीर को सबसे ज्यादा शक्ति देता
हैं | दिन के खाने को हमे सबसे ज्यादा मात्रा में खाना चाहिए |
Afternoon Sleep |
दोपहर को सोना :
दुनिया में काफी ऐसे जगह हैं दोपहर में कई दुकाने भी बंद हो जाती हैं और
लोग घर जा कर सो जाते हैं | आयुर्वेद में दोपहर को सोने को कोई खास प्रोहोत्साहन
नहीं दिया गया हैं | आयुर्वेद में कहा गया हैं की गर्मियों के दिनों में जब गर्मी
अधिक हो तब इंसान को शरीर की उर्जा बचने के लिए थोड़ी देर दिन में सो जाना चाहिए |
सामान्य जीवन शाम तक जरी रखा जा सकता हैं |
आयुर्वेद में Evening recreation activity पर जोर दिया गया हैं | हर मनुष्य
को कम से कम एक ऐसी आदत अपने अन्दर लाना चाहिए जो अपनी रोज्मर्हा के काम से अलग हो
| जैसे चित्रकारी, संगीत, खेल-कूद आदि |
Dinner | रात का भोजन :
सूर्यास्त होने के बाद शरीर का पाचनतंत्र काफी धीमा हो जाता हैं | हमे
हमारा रात का खाना सूर्यास्त होने के कुछ देर बाद ही कर लेना चाहिए | तक़रीबन शाम 8
से 8:30 के भीतर | यदि हम सूर्यास्त के काफी देर बाद खाना खाते हैं तो खाना पचने
में काफी समय लगता हैं जो शरीर के लिए नुक्सान दायक होता हैं |
Sleep Time | सोने का
समय :
हमारे खाना
खाने के समय और सोने के समय में कम से कम 2 घंटे का अंतर होना चाहिए | खाना खाने
के तुरंत बाद सो जाना मोटापे की वजह होती हैं | ऐसा करने से शरीर में भारीपन आता
हैं और दिमाग के सोचने समझने की शमता भी धीमी हो जाती हैं |
यहाँ हमारा
दिनचर्या ख़त्म होता हैं पर इसके बाद ही रात्रिचर्या की शुरुवात होती हैं | जिसके
बारे में हम आपको किसी और BLOG मैं बताएँगे |

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